बैंकों में नकदी की हो सकती है भारी किल्लत, आरबीआई के आंकड़ों से बढ़ी चिंता

मुंबई-देश में बैंकिंग सिस्टम के भीतर एक दिलचस्प लेकिन चिंताजनक तस्वीर उभर रही है। RBI के ताजा आंकड़े बताते हैं कि बैंकों द्वारा दिया जा रहा कर्ज लगातार तेज रफ्तार से बढ़ रहा है, लेकिन उसी गति से पैसा जमा नहीं हो रहा। फरवरी 2026 में गैर-खाद्य कर्ज की ग्रोथ 15.2% तक पहुंच गई, जो पिछले महीनों के मुकाबले ज्यादा है। हालांकि मार्च के मध्य तक इसमें हल्की नरमी जरूर आई और यह 14.6% पर आ गई, लेकिन ट्रेंड साफ है। कर्ज की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।

इस तेजी के बीच सबसे बड़ी चिंता डिपॉजिट ग्रोथ को लेकर है। बैंकों में जमा सिर्फ 11.4% की दर से बढ़ रहा है, जो लोन ग्रोथ से काफी कम है। यही अंतर अब दबाव बनकर सामने आ रहा है। बैंकों का क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो बढ़कर 81.8% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसका सीधा मतलब है कि बैंक जितना पैसा जमा कर रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा कर्ज दे रहे हैं।

जमा की धीमी रफ्तार ने बैंकों को नए रास्ते तलाशने पर मजबूर कर दिया है। सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD) जैसे साधनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। अब कुल जमा में इनकी हिस्सेदारी 2.7% तक पहुंच गई है, जो कुछ महीनों पहले करीब 2% थी। यह इशारा है कि बैंक अब पारंपरिक जमा पर पूरी तरह निर्भर नहीं रह पा रहे हैं।

एंटीक ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्ज की यह तेजी किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है। इंडस्ट्री, सर्विस और रिटेल- सभी में मजबूत बढ़त देखने को मिली है। इंडस्ट्री में बड़े कॉरपोरेट कर्ज की रफ्तार तेज हुई है, जो यह संकेत देता है कि कंपनियां फिर से निवेश की तैयारी कर रही हैं। MSME सेक्टर में भी कर्ज की मांग ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। सर्विस सेक्टर में खासतौर पर NBFC को दिए जाने वाले कर्ज में अच्छी बढ़त दर्ज की गई है, जो फंड की बढ़ती जरूरत को दिखाता है।

रिटेल लोन में भी अच्छी ग्रोथ रही, लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली तेजी गोल्ड लोन में देखने को मिली। इसमें 100% से ज्यादा की सालाना बढ़त दर्ज की गई। इसके मुकाबले हाउसिंग लोन की ग्रोथ स्थिर रही और वाहन कर्ज में भी ठीक-ठाक बढ़त बनी रही। यह ट्रेंड यह भी दिखाता है कि लोग तेजी से तरलता के लिए गोल्ड को इस्तेमाल कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में लोन ग्रोथ 13% से 13.5% के बीच रह सकती है। हालांकि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता, खासकर पश्चिम एशिया में तनाव, इस रफ्तार को प्रभावित कर सकता है। पूरी तस्वीर को देखें तो साफ है कि बैंकिंग सिस्टम में कर्ज की मांग मजबूत बनी हुई है, जो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। लेकिन दूसरी तरफ, जमा की धीमी रफ्तार, बढ़ती लागत और घटते मार्जिन एक नई चुनौती खड़ी कर रहे हैं।

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