म्यूचुअल फंड नियमों में संशोधन, अब सोने और चांदी में ज्यादा निवेश कर सकेंगे निवेशक
मुंबई। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। कुछ नई श्रेणियों की योजनाओं को शामिल किया गया है। पोर्टफोलियो ओवरलैप पर अंकुश लगाया गया है। सोने-चांदी में अधिक निवेश की मंजूरी दी गई है। यह कदम नियामक के म्यूचुअल फंड नियमों को और सख्त बनाने के प्रयासों का हिस्सा है। इसके तहत स्कीमों का स्पष्ट वर्गीकरण और मानकीकृत खुलासे किए जाएंगे। इससे भारत के तेजी से बढ़ते 900 अरब डॉलर के उद्योग में निवेशकों की सुरक्षा मजबूत होगी।
पिछले पांच वर्षों में इक्विटी म्यूचुअल फंड में 12.02 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इससे अस्थिर विदेशी निवेश को स्थिरता मिली है और घरेलू बाजारों को समर्थन मिला है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने लंबे समय तक निवेश में बने रहने के लिए लाइफ-साइकल फंड और सेक्टोरल डेट फंड सहित नई फंड श्रेणियां शुरू की हैं। इससे म्यूचुअल फंड समूहों की कुल संख्या 36 से बढ़कर 40 हो गई है।
मौजूदा श्रेणियों के लिए सेबी यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम लागू कर रहा है कि योजनाएं अपने नाम के अनुरूप बनी रहें, ताकि पोर्टफोलियो अपने परिभाषित परिसंपत्ति वर्ग के अनुरूप हों और जोखिम मानकों के भीतर रहें।
नियामक सेक्टोरल, वैल्यू और कॉन्ट्रा इन्वेस्टमेंट फंडों के पोर्टफोलियो में ओवरलैप को भी सीमित करेगा।
एसेट मैनेजर वैल्यू और कॉन्ट्रा स्कीम दोनों को जारी रख सकते हैं, लेकिन पोर्टफोलियो के बीच ओवरलैप 50 फीसदी से अधिक नहीं हो सकता। थीमेटिक इक्विटी स्कीमों के लिए लार्ज-कैप स्कीमों को छोड़कर पोर्टफोलियो का 50 फीसदी से अधिक हिस्सा अन्य थीमेटिक या इक्विटी श्रेणियों के साथ ओवरलैप नहीं हो सकता। थीमेटिक फंडों को नए नियमों का पालन करने के लिए तीन साल का समय दिया गया है, जबकि अन्य स्कीमों को छह महीने का समय दिया गया है।
इस बड़े बदलाव से एक ही म्यूचुअल फंड कंपनियों के भीतर डुप्लिकेट फंड कम होंगे। इससे अलग-अलग नामों से एक ही पोर्टफोलियो वाली कई योजनाओं को चलाना मुश्किल हो जाएगा। एसेट मैनेजरों को अपनी वेबसाइटों पर मासिक श्रेणी-वार ओवरलैप खुलासे भी प्रकाशित करने होंगे।
सेबी ने नए लाइफ साइकल फंड को लॉन्च किया है। साथ ही, तत्काल प्रभाव से सॉल्यूशन-ओरिएंटेड योजनाओं को बंद कर दिया है और मौजूदा योजनाओं को सब्सक्रिप्शन रोकने और नियामक अनुमोदन के अधीन, समान परिसंपत्ति आवंटन और जोखिम प्रोफाइल वाली समान योजनाओं में विलय करने का निर्देश दिया है। इस ढांचे में डिविडेंड यील्ड, वैल्यू और कॉन्ट्रा फंड्स के लिए न्यूनतम 80 फीसदी इक्विटी आवंटन को भी जारी रखा गया है।
सोने और चांदी में बढ़ा निवेश
सेबी के नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड्स को इक्विटी स्कीमों में तय सीमा के निवेश के बाद बाकी बचे हिस्से को सोने और चांदी के साधनों में निवेश करने की अनुमति दी गई है। हाइब्रिड स्कीमों को सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में निवेश करने की अनुमति दी गई है। हालांकि कुछ मल्टी-एसेट फंड पहले से ही गोल्ड ईटीएफ में निवेश कर सकते थे। नए नियमों ने इक्विटी और हाइब्रिड स्कीमों में विशेष रूप से बाकी बचे हिस्से के भीतर कीमती धातुओं में निवेश को मानकीकृत किया है।
नए लाइफ-साइकिल फंडों के तहत योजनाएं सोने और चांदी के ईटीएफ, एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ईटीसीडी) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) में 10 फीसदी तक निवेश कर सकती हैं। इन बदलावों से म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में सोने और चांदी को शामिल करने की प्रक्रिया औपचारिक हो गई है, जिससे निवेशकों को इन धातुओं का उपयोग मुख्य रूप से विविधीकरण के साधन के रूप में करने का एक विनियमित तरीका मिल गया है।
म्यूचुअल फंड स्कीम अब मुख्य रूप से 5 कैटेगरी में
म्यूचुअल फंड कैटेगराइजेशन और रेशनलाइजेशन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। रेगुलेटर ने इक्विटी, डेट और हायब्रिड फंड्स में बंटवारा साफ कर दिया है। फंड स्कीम को मुख्य रूप से 5 कैटिगरी में बांटा गया है।
क्या है लाइफ साइकल फंड
यह नया और अहम हिस्सा है।
यह टार्गेट डेट फंड होंगे
इसमें शुरुआत में ज्यादा इक्विटी में निवेश होगा। जैसे-जैसे मैच्योरिटी पास आएगी, इक्विटी कम, डेट ज्यादा होगा। यानी जोखिम अपने आप कम होता जाएगा।
फंड ऑफ फंड पर सख्ती
फंड ऑफ फंड (एफओएफ) वह फंड होते हैं जो दूसरे म्यूचुअल फंडों की स्कीमों में निवेश करते हैं। अब 95 फीसदी पैसा अंडरलाइंग फंड में लगाना जरूरी होगा। इक्विटी फंड ऑफ फंड, डेट फंड ऑफ फंड, हाइब्रिड फंड ऑफ फंड अलग-अलग स्पष्ट कर दिए गए हैं। म्यूचुअल फंड कितने एफओएफ लॉन्च कर सकता है उसकी सीमा तय कर दी गई है। हर महीने पोर्टफोलियो ओवरलैप बताना होगा। स्कीम का नाम उसी कैटेगरी जैसा होना चाहिए।
इक्विटी स्कीम में ये बदलाव होंगे
इक्विटी कैटिगरी में वर्तमान में कुल 11 अलग-अलग स्कीम्स आती हैं।
अभी कुल 552 इक्विटी स्कीम्स हैं जिनका एयूएम 34.87 लाख करोड़ रुपये है।
मल्टी कैप : कम से कम 75% इक्विटी में निवेश जरूरी।
लार्जकैप, मिडकैप, स्मॉलकैप में 25%-25%-25% निवेश जरूरी।
लार्ज कैप :लार्जकैप में मिनिमम 80% निवेश जरूरी
लार्ज और मिड कैप : लार्जकैप में कम से कम 35% निवेश जरूरी।
मिडकैप्स में कम से कम 35% निवेश जरूरी।
मिड कैप : मिडकैप्स में कम से कम 65% निवेश जरूरी।
स्मॉल कैप : स्मॉलकैप्स में कम से कम 65% निवेश जरूरी।
फ्लैक्सीकैप :इक्विटी में कम से कम 65% निवेश जरूरी।
ईएलएसएस में इक्विटी में कम से कम 80% निवेश जरूरी होगा।
5-30 साल तक का होगा लाइफ साइकिल फंड
नए लाइफ साइकल फंड 5 से 30 साल तक के लिए होंगे। सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीम तुरंत बंद होगी। वर्तमान में इस कैटिगरी में कुल 41 स्कीम्स हैं जिनके फोलियो की कुल संख्या 62,61,999 है। इसकी जगह पर लाइफ साइकल फंड आएंगे। इनके लिए 3% तक एग्जिट लोड होंगे।

