आइसक्रीम के कारोबार से कंपनियां कर रहीं किनारा, नेस्ले समेटेगी पूरा कारोबार
मुंबई- दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य और पेय कंपनी नेस्ले आइसक्रीम के कारोबार को ‘ठंडे बस्ते’ में डालने जा रही है। दरअसल वैश्विक एफएमसीजी सेक्टर में कुछ समय से एक ट्रेंड देखा जा रहा है। नेस्ले ने कहा, वह अपने शेष आइसक्रीम पोर्टफोलियो को संयुक्त उद्यम साझेदार ‘फ्रोनेरी’ को बेचने के लिए बातचीत कर रही है।
दिग्गज कंपनियों का आइसक्रीम बिजनेस से मोहभंग हो रहा है। इस सौदे में हागेन-डाज और ड्रमस्टिक जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड शामिल हैं, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 11,800 करोड़ रुपए आंकी गई है। नेस्ले के नए सीईओ फिलिप नवरतिल ने पद संभालते ही कंपनी के बिखरे हुए साम्राज्य को समेटने का फैसला किया है।
नवरतिल के मुताबिक, आइसक्रीम ब्रांड कंपनी के मुख्य बिजनेस के लिए एक भटकाव बन गए थे। कंपनी अब अपना पूरा ध्यान उन 4 सेगमेंट पर लगाएगी, जहां उसका दबदबा सबसे ज्यादा है- कॉफी, पेट केयर, न्यूट्रिशन और स्नैक्स।
हम इन ब्रांड्स को उस गति से आगे नहीं बढ़ा सकते, जिस तरह फ्रोनेरी जैसी विशेषज्ञ कंपनियां बढ़ा सकती हैं। नेस्ले अब लागत कम करने के लिए एआई और ऑटोमेशन का सहारा ले रहा है और 16,000 नौकरियां घटाने की योजना बना रहा है।
नेस्ले अकेली ऐसी कंपनी नहीं है।यूनिलीवर ने बीते दिसंबर में प्रसिद्ध आइसक्रीम डिवीजन मैग्नम को अलग कर दिया। अमेरिकी दिग्गज कंपनी जनरल मिल्स अपनी आइसक्रीम यूनिट को पहले ही लैक्टालिस को बेच चुकी है। दुनिया की सबसे बड़ी डेयरी निर्यातक कंपनी फोंटेरा भी अपने ग्लोबल कंज्यूमर और आइसक्रीम बिजनेस को बेचने की प्रक्रिया में है। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी लैक्टालिस ने 20,000 करोड़ रुपए से अधिक की भारी-भरकम बोली लगाई है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जटिल कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स, बिजली की भारी खपत और सीजन पर निर्भरता ने आइसक्रीम को एक ‘मुश्किल बिजनेस’ बना दिया है। लोग अब चीनी और कैलोरी के सेवन को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं।

