रेपो दर से सेंसेक्स में दो महीने की बड़ी गिरावट, निवेशकों के 7 लाख करोड़ डूबे  

मुंबई। आरबीआई के करीब चार साल बाद रेपो दर में वृद्धि के फैसले से बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई। बुधवार को सेंसेक्स 2.29 फीसदी लुढ़क गया, जो इसकी दो महीने की सबसे बड़ी गिरावट है। भू-राजनीतिक तनाव के कारण बढ़ रही महंगाई को काबू करने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले केंद्रीय बैंक के उठाए गए इस कदम से बाजार की धारणा प्रभावित हुई। इससे सेंसेक्स 1,306 अंक लुढ़ककर 55,669 पर बंद हुआ। यह सेंसेक्स में लगातार तीसरे दिन गिरावट है। 

इससे पहले दिन के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 149 अंकों की उछाल के साथ खुला था। निफ्टी भी 391 अंक या 2.29 फीसदी गिरकर 16,677 पर बंद हुआ। सेंसेक्स की 30 में 27 कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए। बजाज फाइनेंस सर्वाधिक 4.29 फीसदी नुकसान में रहा। यह कदम उस दिन उठाया गया, जब भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का आईपीओ खुला है। 

हांगकांग के हैंगसैंग में 1.1 फीसदी की गिरावट रही, जबकि सियोल का कॉस्पी 0.1 फीसदी नुकसान में रहा। एसएंडपी-200 में 0.2 फीसदी और एसएंडपी-500 में 0.2 फीसदी तेजी रही। अमेरिकी शेयर बाजार हरे निशान में बंद हुए, जबकि यूरोपीय बाजारों में दोपहर के कारोबार में गिरावट रही। 

बीएसई का मिडकैप 2.63 फीसदी और स्मॉलकैप 2.11 फीसदी फिसल गया। बीएसई कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे ज्यादा 3.88 फीसदी गिरावट रही। रियल्टी सूचकांक 3.31 फीसदी, उत्पाद एवं सेवा 3.01 फीसदी, हेल्थकेयर 2.92 फीसदी और दूरसंचार सूचकांक 2.73 फीसदी लुढ़क गया। बाजार में गिरावट से निवेशकों को 6.27 लाख करोड़ रुपये चपत लगी। इससे उनकी संयुक्त पूंजी 265.88 लाख करोड़ से कम होकर 259.60 लाख करोड़ रुपये रह गई। 

अमेरिकी केंद्रीय बैंक की बैठक से पहले वैश्विक बाजार ‘देखो और प्रतीक्षा करो’ की नीति अपना रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 1,853 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से भी बाजार की धारणा पर असर पड़ा। महंगाई और बढ़ने की आशंका से नीतिगत दरों में आगे भी बढ़ोतरी की जा सकती है। 

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