महंगाई की और पड़ेगी मार, अब साबुन तेल और पेंट के लिए देना होगा ज्यादा पैसा
मुंबई- महंगाई की और मार पड़ने वाली है। अब साबुन, तेल और पेंट के लिए और ज्यादा पैसा देना होगा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये ने FMCG कंपनियों की लागत बढ़ा दी है। ‘नुवामा’ की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, नए वित्त वर्ष (FY27) की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में साबुन, तेल और पेंट जैसी चीजों के दाम 3 से 4 फीसदी तक बढ़ सकते हैं।
किसी भी FMCG कंपनी के कुल खर्च का 15 से 20% हिस्सा केवल पैकेजिंग यानी प्लास्टिक की बोतलें, ढक्कन, रैपर पर होता है। क्रूड महंगा होने से पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीइथाइलीन जैसे पेट्रोकेमिकल्स महंगे हो गए हैं, जिससे पैकेजिंग की लागत बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। पेंट कंपनियों के लिए 40% कच्चा माल क्रूड डेरिवेटिव्स से जुड़ा होता है। ऐसे में उनकी लागत बढ़ गई है जिससे प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ने की संभावना जताई गई है।
बर्जर पेंट्स ने मार्च के अंत से दाम बढ़ाए हैं, जबकि एशियन पेंट्स अप्रैल के मध्य से कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी कर सकती है। नहाने के साबुन और कपड़े धोने के पाउडर की कीमतों में भी उछाल आने की संभावना है। गर्मी के सामान की बिक्री पर ‘बेमौसम बारिश’ की मार है। खाने के तेल भी महंगे हो रहे हैं।
मार्च के महीने में उत्तर और पूर्वी भारत में हुई बेमौसम बारिश ने कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम कंपनियों का गणित बिगाड़ दिया है। बारिश और ठंडे मौसम के कारण टेलकम पाउडर, आइसक्रीम और ठंडे पेय पदार्थों की मांग कम रही है। ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने उन भारतीय कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है जिनका कारोबार खाड़ी देशों में है। डाबर और इमामी जैसी कंपनियों की कुल बिक्री का लगभग 6% हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। युद्ध के कारण वहां सप्लाई चेन और इंश्योरेंस की लागत बढ़ गई है।

