एशिया छोड़कर भाग रहे विदेशी निवेशक, एक माह में कभी नहीं हुई इतनी बिकवाली
मुंबई- ईरान युद्ध का सबसे ज्यादा असर एशियाई देशों पर पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि होर्मुज की खाड़ी से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई का अधिकांश हिस्सा इन्हीं देशों को जाता है। तेल और गैस संकट के कारण अब एशियाई देशों की इकॉनमी भी डगमगाने लगी है। यही वजह है कि विदेशी निवेशक अब इन देशों के शेयर बाजारों से तेजी से अपना पैसा निकालने में लगे हैं।
मार्च में वे एशिया के एमर्जिंग मार्केट्स से 52 अरब डॉलर निकाल चुके हैं जो एक महीने में अब तक की सबसे बड़ी निकासी है। इसमें चीन शामिल नहीं है। इससे पहले 2020 की महामारी और रूस-यूक्रेन लड़ाई के दौरान जून, 2022 में विदेशी निवेशकों ने एशियाई बाजारों से जमकर निकासी की थी। लेकिन इस बार ये आंकड़े कहीं पीछे छूट गए हैं। सबसे ज्यादा निकासी ताइवान, दक्षिण कोरिया और भारत के इक्विटी मार्केट्स से की गई है।
एनएसडीएल और बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से रेकॉर्ड 1.14 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है। यह विदेशी निवेशकों की भारतीय इक्विटी में एक महीने में की गई सबसे ज्यादा बिकवाली है। इससे पहले अक्तूबर 2024 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 94,017 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी।
एनएसडीएल के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशक इस साल अब तक भारत से 1.27 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। ईरान युद्ध से कच्चे तेल की कीमत में भारी तेजी आई है और इससे देश की ग्रोथ प्रभावित होने की आशंका है।
ईरान युद्ध की सबसे ज्यादा मार एशियाई देशों पर ही पड़ रही है क्योंकि होर्मुज की खाड़ी से आने वाला 80 फीसदी तेल इन्हीं देशों को जाता है। इस वजह से एशियन मार्केट्स पर भारी दबाव दिख रहा है। साथ ही डॉलर में तेजी और चिप स्टॉक्स में मुनाफावसूली ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है।

