पहली बार 1 डॉलर 95.22 रुपये का, मोबाइल, सोना, विदेशी सामान खरीदना महंगा

मुंबई- ईरान जंग की वजह से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 के पार पहुंच गया। कारोबार के दौरान ये 95.22 के सबसे निचले स्तर पर गिर गया। हालांकि बाद में ये थोड़ा संभला और कारोबार खत्म होने पर 94.78 पर बंद हुआ।

रुपए की कमजोरी का असर आम आदमी पर भी होगा। इससे विदेशों से इम्पोर्ट होने वाले सामान जैसे मोबाइल, सोना-चांदी, कच्चा तेल खरीदना महंगा हो जाएगा। इससे महंगाई बढ़ेगी।

रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है। खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिसके लिए डॉलर में पेमेंट करना पड़ता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हो गया।

एक महीने में रुपया करीब 4% गिरा है। वहीं इस वित्त वर्ष में रुपया 10% से ज्यादा टूट चुका है। विदेशी निवेशकों ने मार्च में अब तक शेयर बाजार से करीब 1.15 लाख करोड़ रुपए निकाल लिए हैं। युद्ध और अनिश्चितता के डर से निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों के बजाय अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश कर रहे हैं। इस भारी बिकवाली ने रुपए पर दबाव बढ़ा दिया है।

रुपया कमजोर होने से भारत के लिए आयात महंगा हो जाएगा। क्रूड ऑयल जैसी चीजों के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। इसके अलावा विदेश से इंपोर्ट किए जाने वाले मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान भी महंगे होंगे। विदेश में पढ़ाई महंगी हो जाएगी।

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