क्रेडिट कार्ड का कर रहे हैं इस्तेमाल तो सावधान, एक अप्रैल से यह होगा बदलाव
मुंबई-नया फाइनेंशियल ईयर 1 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। इसके साथ ही क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में भी बदलाव होने जा रहा है। देश में 11 करोड़ से अधिक एक्टिव क्रेडिट कार्ड यूजर हैं और हर महीने दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का ट्रांजैक्शन होता है।
एक अप्रैल से आपका क्रेडिट कार्ड केवल पेमेंट टूल नहीं रह जाएगा। यह आपके टैक्स प्रोफाइल से जुड़ा एक मजबूत फाइनेंशियल दस्तावेज बन जाएगा। अगर आपकी इनकम, खर्च और टैक्स फाइलिंग में कोई अंतर नहीं है तो आपको नए नियमों से बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आपका खर्च ज्यादा है और रिपोर्टेड इनकम कम है तो आप टैक्स विभाग की नजर में आ सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए सबसे बड़ा बदलाव हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग को लेकर है। ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक अगर किसी यूजर ने एक फाइनेंशियल ईयर में क्रेडिट कार्ड से ₹10 लाख या उससे ज्यादा का भुगतान किया है तो आपका बैंक इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को दे सकता है। साथ ही तय लिमिट से ज्यादा विदेशी खर्च पर भी विभाग की नजर रहेगी। ₹1 लाख या उससे ज्यादा कैश लेनदेन पर भी और ज्यादा नजर रहेगी। साफ है कि अगर आपका खर्च आईटीआर ने दिखाई गई इनकम से ज्यादा रहता है तो आपको नोटिस आ सकता है।
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार दूसरा बड़ा बदलाव यह है कि पैन को क्रेडिट कार्ड से लिंक करना अनिवार्य बना दिया गया है। 1 अप्रैल के बाद बैंक बिना क्रेडिट कार्ड जारी नहीं करेंगे। साथ ही आपको अपने मौजूदा क्रेडिट कार्ड को भी पैन से लिंक कराना होगा। इस तरह क्रेडिट कार्ड आपकी टैक्स आइडेंटिटी का एक अहम हिस्सा बन जाएगा। इतना ही नहीं अगर आपका क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट तीन महीने से ज्यादा पुराना नहीं है, तो उसे पैन बनवाते समय एड्रेस प्रूफ के रूप में दिया जा सकता है।

