शेयरों में निवेश करने वालों को 50 फीसदी घाटा, लेकिन म्यूचुअल फंड में मिला फायदा

मुंबई। ईरान-इस्राइल और अमेरिका के युद्ध के चलते वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट है। इससे भारतीय बाजार भी अछूता नहीं रहा है और बीएसई सेंसेक्स के साथ निफ्टी में भी पिछले एक महीने में तेज गिरावट आई है। आंकड़ों से पता चलता है कि जिन निवेशकों ने सीधे शेयरों में निवेश किया है उनको 50 फीसदी तक घाटा उठाना पड़ा है। लेकिन जिन निवेशकों ने म्यूचुअल फंड के जरिये शेयरों को खरीदा है उनको फायदा हुआ है।

अर्थलाभ के अध्ययन के आंकड़ों से पता चलता है कि युद्ध के पहले जिन निवेशकों ने सीधे इक्विटी में निवेश किया, उनका जो पहले फायदा था, वह तो डूबा ही और उनका मूलधन भी 30 फीसदी तक घट गया है। चाहे वे लार्ज कैप हों, मिड कैप हों या स्मॉल कैप हों या फिर कोई और सेक्टर हो।

उदाहरण के तौर पर एक निवेशक रमेश ने युद्ध से पहले एनएसडीएल, टाटा कैपिटल, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, यस बैंक, अदाणी विल्मर लि, सम्मान कैपिटल, वोडाफोन जैसे ठीक ठाक 14 कंपनियों के शेयरों में करीब 10 लाख रुपये का निवेश किया था। युद्ध शुरू होने के बाद यह 10 लाख रुपये घटकर 7 लाख रुपये रह गया। इसमें से केवल आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ही फायदेमंद रहा।

दूसरी ओर एक निवेशक ने म्यूचुअल फंड के जरिये शेयरों में निवेश किया था। युद्ध से पहले उसका पोर्टफोलियो 4 लाख रुपये फायदे में था। हालांकि, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक उसका पोर्टफोलियो का मूलधन तो वहीं रहा और फायदे में केवल दो लाख की गिरावट रही। यानी उसका 10 लाख रुपये और दो लाख रुपये फायदे के साथ पूरा फोर्टफोलियो 12 लाख रुपये पर रहा। जबकि जिस निवेशक ने सीधे शेयरों में निवेश किया उसका पोर्टफोलियो घटकर केवल 7 लाख रुपये रह गया। इसका मतलब कि म्यूचुअल फंड के जरिये शेयरों में निवेश करने वाले को 5 लाख रुपये का फायदा हुआ है।

दरअसल म्यूचुअल फंड किसी भी सेक्टर की टॉप कंपनियों के शेयरों में जब निवेश करते हैं तो वह काफी रिसर्च करते हैं। उसमें जोखिम और आगे बढ़ने के साथ मुनाफे पर भी ध्यान देते हैं। ऐसे में एक फंड मैनेजर बहुत सोच समझकर निवेशक के पैसे को कहीं लगाता है। लेकिन जो निवेशक सीधे शेयरों में निवेश करता है, वह बहुत रिसर्च नहीं करता है और किसी के कहने या टिप्स पर निवेश कर देता है। जिससे इस तरह के माहौल में उसका मूलधन भी डूब जाता है या कम हो जाता है।

म्यूचुअल फंड एडवाइजर एमएफ किंग के एमडी डीडी शर्मा कहते हैं कि पिछले पांच साल में अगर ब्लूचिप या बड़ी कंपनियों के शेयरों का रिटर्न देखें तो निवेशक घाटे में रहे हैं। उदाहरण के तौर पर व्हर्लपूल के शेयर ने 64 पर्सेंट का घाटा दिया है। बाटा ने 56 पर्सेंट का, ग्लैंड फार्मा ने 36 पर्सेंट का, हनीवेल ऑटोमेशन ने 34 पर्सेंट का घाटा दिया है। गुजरात गैस ने 32 पर्सेंट का, बर्जर पेंट्स ने 31 पर्सेंट, टीसीएस ने 22 पर्सेंट, जुबिलेंट फूडवर्क्स 21 फीसदी, डाबर ने 18 फीसदी, इमामी ने 14 फीसदी और एचडीएफसी लाइफ ने 10 फीसदी का घाटा दिया है।

उधर, दूसरी ओर पांच साल में म्यूचुअल फंड की फ्लैक्सीकैप, मिडकैप और स्मॉल कैप ने औसत रिटर्न 14 से 16 फीसदी सालाना दिया है। यानी इस तरह से पांच साल में निवेशकों की रकम दोगुनी हो गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *