ट्रंप के बयान से कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट, 16 पर्सेंट टूटा, आगे और गिरेगा
मुंबई-कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को 16 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि वह ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित सैन्य हमलों को फिलहाल टालने का आदेश देंगे। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई।
ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 16 प्रतिशत गिरकर 92 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर तक आ गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 13 डॉलर यानी लगभग 13.5 प्रतिशत गिरकर 85.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों से मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को खत्म करने को लेकर बातचीत हो रही है।
उन्होंने बताया कि इन चर्चाओं के माहौल को देखते हुए उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को निर्देश दिया है कि ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा ढांचे पर होने वाली सभी सैन्य कार्रवाइयों को पांच दिनों के लिए टाल दिया जाए।
इससे पहले ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि वह वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दे। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इस मार्ग से सामान्य जहाजों की आवाजाही कब शुरू होगी। इस बीच गोल्डमैन सैक्स ने तेल की कीमतों को लेकर अपने अनुमान बढ़ा दिए हैं। CNBC के मुताबिक बैंक का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाईको लेकर जोखिम अभी भी बना हुआ है।
बैंक ने ब्रेंट क्रूड के लिए मार्च और अप्रैल में औसतन 110 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया है। पहले यह अनुमान 98 डॉलर था। वहीं WTI के लिए मार्च में 98 डॉलर और अप्रैल में 105 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान जताया गया है। गोल्डमैन सैक्स के एनालिस्टों का कहना है कि अगर 10 अप्रैल तक होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई सामान्य स्तर के करीब 5 प्रतिशत तक ही सीमित रहती है, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।
गोल्डमैन सैक्स ने यह भी कहा है कि अगर तेल की सप्लाई में कमी करीब 10 सप्ताह तक बनी रहती है, तो ब्रेंट क्रूड 2008 के अपने रिकॉर्ड स्तर को भी पार कर सकता है। ब्रेंट क्रूड जुलाई 2008 में करीब 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। बाद में वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान इसमें तेज गिरावट आई थी।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ का कहना है कि तेल की कीमतों का निकट भविष्य काफी अनिश्चित बना हुआ है और यह काफी हद तक अगले 24 घंटों में होने वाली घटनाओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल बाजार तेल की कीमत करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मानकर चल रहा है। हालांकि अगर तनाव बढ़ता है तो कीमतें काफी ऊपर जा सकती हैं और 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भी मुमकिन है।
उनके मुताबिक- तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और क्षेत्र में चल रहे संघर्ष पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहा है।

