अब IVF से पैदा होंगी रोजाना 50-60 लीटर दूध देने वाली गाय, देश में पहली बार 116 गायों पर सफल परीक्षण

बरेली: पशुपालकों और किसानों के लिए अच्छी खबर है। देश में आने वाले छह महीने के अंदर आप 50 से 60 लीटर रोजाना दूध देने वाली गाय हासिल कर सकते हैं। खास बात है कि ये गाय देशी होंगी। देश की डेयरी, कृषि और कृषि तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाली बीएल एग्रो की सहायक कंपनी लीड्स जेनेटिक्स ने इन-विट्रो फ़र्टिलाइजेशन यानी IVF के जरिए गिर, साहिवाल और एचएफ गायों के भ्रूण स्थानांतरण में सफलता हासिल की है। पहले चरण में कंपनी ने 116 गायों में भ्रूण स्थानांतरण का काम किया, जिसमें 70 प्रतिशत गायों ने गर्भ धारण कर लिया है। इनमें भी 90 प्रतिशत बछिया है, जबकि 10 प्रतिशत बछड़ा है। जन्म के बाद गाय के रूप में जब ये बछिया तैयार हो जाएंगी तो इनके दूध देने की क्षमता मौजूदा गिर और साहिवाल गाय के मुकाबले कहीं ज्यादा होगी। बीएल एग्रो ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष खंडेलवाल ने ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये गाय तैयार होने के बाद 50 से 60 लीटर प्रतिदिन दूध देंगी। जबकि देश में मौजूदा गिर और साहिवाल की औसतन दूध देने क्षमता महज 4 से 5 लीटर है। ऐसे में अब नई क्रांति की तरफ देश कदम बढ़ा चुका है।

बीएल ग्रुप ने तैयार की देश की पहली खास लैब
बीएल एग्रो ग्रुप के चेयरमैन घनश्याम खंडेलवाल ने बताया कि बीएल एग्रो ग्रुप देश की पहली कंपनी है, जिसने सिर्फ डेयरी या फिर प्रजनन सुधार का कार्यक्रम शुरू नहीं किया है, बल्कि किसानों और पशुपालकों को एंड टू एंड सुविधा देने के लिए एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की है। आने वाले दिनों में देश के 10 अन्य राज्यों में ऐसे ही सेंटर की स्थापना होगी। यहां देशी गाय जिसमें खासतौर पर गिर और साहिवाल गायों का भ्रूण तैयार होगा। जिसे किसान अपनी गायों में IVF के जरिए ट्रांसफर करवा सकेंगे। खास बात है कि ये पूरी प्रक्रिया बीएल एग्रो ग्रुप के विशेषज्ञों द्वारा ही की जाएगी, ताकि बेहतर परिणाम मिले। सेंटर में आईवीएफ सुविधा, पैथोलॉजी, जीनोमिक्स लैब भी है।

देशी गायों के भ्रूण स्थानांतरण के क्या फायदे मिलेंगे?
अच्छी नस्ल की गायें तेजी से बढ़ेंगी : अभी देश में गायों की संख्या बहुत ज्यादा है। दूध उत्पादन के मामले में भी भारत आगे है, लेकिन अगर प्रति गाय प्रतिदिन दूध उत्पादन की क्षमता देखें तो इस मामले में हम बहुत पीछे हैं। ब्राजील और अमेरिका जैसे कई देश हमसे कहीं आगे हैं। भ्रूण स्थानांतरण कार्यक्रम से तैयार होने वाली गाय अच्छी नस्ल की होंगी और इसका सीधा फायदा देश को होगा।
50 से 60 लीटर प्रतिदिन दूध देने वाली गाय पैदा होगी : इससे किसानों की आय में इजाफा होगा और किसान आर्थिक तौर पर मजबूत हो सकेंगे।
गाय के बीमार होने की संभावना कम होगी: पहले ही विशेषज्ञ बता देंगे कि इस गाय के पूर्वजों में कौन-कौन सी बीमारी थी। मतलब उसके बचाव के लिए किसान पहले से ही तैयार रहेंगे और उसका टीकाकरण करवा लेंगे।

ब्राजील की कंपनी के साथ समझौता
बीएल एग्रो ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष खंडेलवाल ने बताया कि कई दशक पहले भारत के एक राजा ने गिर नस्ल की गाय को ब्राजील के एक परिवार को भेंट की थी। उस गाय की नस्ल को ब्राजील के वैज्ञानिकों ने बेहतर तरीके से विकसित किया। आज वो गिर गाय वहां 60 लीटर प्रतिदिन दूध देती है। अब उस गिर गाय की नस्ल को वापस भारत लेकर आए हैं। इसके लिए ब्राजील की एम्ब्रापा (MAPA के अंतर्गत राज्य-स्वामित्व वाला कृषि अनुसंधान संस्थान), फजेन्डा फ्लोरेस्टा और लीड्स जेनेटिक्स के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ है। ब्राजील के वैज्ञानिक इसमें मदद कर रहे हैं।

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