1-अप्रैल से इनकम टैक्स के नए नियम लागू होंगे, सैलरी, घर-गाड़ी, रिटायरमेंट फंड में बदलाव
मुंबई- सरकार 1 अप्रैल 2026 से देश में नया इनकम टैक्स सिस्टम लागू करने जा रही है। यह नया कानून मौजूदा इनकम-टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा। इसके मुताबिक, मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स, प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों और बड़े बिजनेस घरानों के लिए टैक्स कैलकुलेशन के तरीके पूरी तरह बदल जाएंगे।
नए नियमों का मकसद सैलरी के साथ मिलने वाली सुविधाओं जैसे- कंपनी का घर, कार और गिफ्ट्स की वैल्यू तय करने के लिए एक फिक्स फॉर्मूला बनाना है, ताकि टैक्स असेसमेंट यानी कैलकुलेशन में पारदर्शिता रहे।
नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। यानी 2026-27 की कमाई और असेसमेंट ईयर 2027-28 के टैक्स रिटर्न पर लागू होंगे। अगर आपकी कंपनी आपके PF, NPS और सुपरएन्युएशन फंड में सालभर में ₹7.5 लाख से ज्यादा जमा करती है, तो अब उस पर टैक्स लगेगा। 7.5 लाख की सीमा से ऊपर वाले कॉन्ट्रीब्यूशन और उस पर मिलने वाले रिटर्न (ब्याज/लाभांश) को ‘टैक्सेबल पर्क्स’ माना जाएगा।
प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों को मिलने वाले एकोमोडेशन यानी घर की टैक्स वैल्यू अब शहर की आबादी के आधार पर तय होगी…
40 लाख से ज्यादा आबादी: सैलरी का 10% हिस्सा टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा।
15 से 40 लाख की आबादी: सैलरी का 7.5% हिस्सा टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा।
अन्य शहर: सैलरी का 5% हिस्सा। यदि कर्मचारी खुद कुछ किराया चुका रहा है, तो उसे इस वैल्यू में से घटा दिया जाएगा।
अगर कंपनी खुद घर किराए पर लेकर कर्मचारी को देती है, तो नियम अलग होगा। इस मामले में कंपनी द्वारा चुकाया गया वास्तविक किराया या कर्मचारी की सैलरी का 10%, इनमें से जो भी कम हो उसे टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा। यह नियम मेट्रो शहरों के लीज रेंटल पर लागू होगा।
ऑफिस की गाड़ी पर्सनल और आधिकारिक दोनों कामों के लिए इस्तेमाल करने पर फिक्स मंथली टैक्स वैल्यू तय की गई है…
1.6 लीटर इंजन तक: ₹5,000 प्रति महीना।
1.6 लीटर से बड़े इंजन: ₹7,000 प्रति महीना।
ड्राइवर की सुविधा: ₹3,000 प्रति महीना अतिरिक्त।
इन फिक्स वैल्यू को सैलरी इनकम के साथ जोड़कर टैक्स निकाला जाएगा।
कंपनियों से मिलने वाले गिफ्ट, वाउचर या टोकन अब सालभर में कुल ₹15,000 तक ही टैक्स-फ्री होंगे। अगर पूरे साल में गिफ्ट्स की वैल्यू ₹15,000 से ज्यादा हुई, तो पूरी राशि पर टैक्स देना होगा। अब तक यह सीमा काफी कम थी।
अगर कंपनी बिना ब्याज या कम ब्याज पर लोन देती है, तो उस फायदे पर टैक्स लगेगा। टैक्स का कैलकुलेशन SBI की ब्याज दर के आधार पर होगी। ₹2 लाख तक के लोन या गंभीर बीमारी के इलाज के लिए लिए गए लोन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
डिजिटल बिजनेस करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए ‘सिग्निफिकेंट इकोनॉमिक प्रेजेंस’ की सीमा तय की गई है। अगर किसी कंपनी का भारत में रेवेन्यू ₹2 करोड़ से ज्यादा है या उसके 3 लाख से ज्यादा भारतीय यूजर्स हैं, तो उसे भारत में टैक्स देना होगा।

