मिड कैप और स्मॉल कैप की जमकर पिटाई, देखिए आपका शेयर कितना टूटा

मुंबई- मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज गिरावट जारी है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स मार्च महीने में अब तक नौ कारोबारी दिन में से सात दिन गिरावट में रहा है और इस दौरान लगभग 10 प्रतिशत टूट गया है।

निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में नेशनल एल्युमिनियम कंपनी (NALCO) और अशोक लीलैंड सबसे बड़े गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। NALCO का शेयर लगभग 5.3 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि अशोक लीलैंड में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी लगातार कमजोरी बनी हुई है। मार्च के नौ कारोबारी दिनों में से सात दिन यह इंडेक्स गिर चुका है और कुल मिलाकर लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज कर चुका है। शुक्रवार को स्मॉलकैप इंडेक्स में भी लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली। इस इंडेक्स में लॉरेस लैब्स (Laurus Labs) और डेटा पैटर्न्स (Data Patterns) के शेयर प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे।

इस सप्ताह अब तक सेंसेक्स करीब 4.5 प्रतिशत और निफ्टी लगभग 4.8 प्रतिशत गिर चुके हैं, जो दिसंबर 2024 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर इशारा करता है। मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक बाजार में कमजोरी की प्रमुख वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ईरान की ओर से दो ऑयल टैंकरों पर हमले की खबरों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं और शुक्रवार को भी यह लगभग 100.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा।

सेंसेक्स और निफ्टी अब अपने लगभग 11 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों के मनोबल पर बड़ा असर डाला है। इस सप्ताह निफ्टी 50 इंडेक्स में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। यह पिछले चार सालों में शेयर बाजार का सबसे खराब सप्ताह साबित हुआ है। इससे पहले जून 2022 में भी निफ्टी एक सप्ताह में 5 प्रतिशत से अधिक गिरा था। वहीं सेंसेक्स करीब 5.5 फीसदी टूट गया, जो पिछले छह सालों यानी मई 2022 के बाद की सबसे बड़ी वीकली गिरावट है।

लगातार बिकवाली के कारण निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस सप्ताह बीएसई में लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में लगभग 20 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई। वहीं मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक निवेशकों की संपत्ति में 33 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आ चुकी है।

गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि अगर इस महीने के अंत तक होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित रहती है तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ऐसी स्थिति ग्लोबल इकोनॉमी और शेयर बाजारों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।

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