शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 2,300 अंक टूटा, 10 सेकंड में डूबे 14 लाख करोड़
मुंबई- भारतीय शेयर बाजार आज खुलते ही भयंकर तरीके से टूट गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 2300 अंक लुढ़क गया। वहीं निफ्टी गिरकर 23,800 से भी नीचे चला गया। यह सेंसेक्स और निफ्टी का पिछले 10 महीनों का सबसे निचला स्तर है। इससे महज 10 सेकंड में ही निवेशकों के 14 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और क्रूड ऑयल का दाम 115 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद शेयर बाजार में आज हाहाकार की स्थिति रही। ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेतों से भी निवेशकों के मनोबल को कमजोर किया। बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
शेयर बाजार में आज की यह भारी बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बाद आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर $115 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। एनालिस्ट्स का कहना है कि यह पूरे ग्लोबल मार्केट्स के लिए एक बड़ा झटका है और इससे फिर से महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए बड़ा असर डाल सकता है। उन्होंने कहा, “ब्रेंट क्रूड $115 से ऊपर पहुंच गया है, जिससे अर्थव्यवस्थाओं और बाजारों को बड़ा ‘क्रूड शॉक’ लगा है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से ग्लोबल स्तर पर महंगाई बढ़ सकती है। इसके कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने में देरी कर सकते हैं, जिससे फाइनेंशियल मार्केट्स में अनिश्चितता और बढ़ सकती है।
ग्लोबल मार्केट्स से भी आज भारतीय बाजार को कोई सपोर्ट नहीं मिला। एशियाई शेयर बाजार शुरुआती कारोबार में तेजी से गिर गए। जापान का निक्केई इंडेक्स 6% से ज्यादा टूट गया, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी तेज गिरावट के साथ नीचे आया। अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गई। निवेशक कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट की आशंका से चिंतित दिखे, जिसकी वजह से बाजारों में बिकवाली बढ़ गई।
मजबूत होता अमेरिकी डॉलर भी बाजार के लिए अच्छा संकेत नहीं रहा। खासकर मेटल सेक्टर के शेयरों के लिए। यूएस डॉलर इंडेक्स लगभग 100 के स्तर के करीब पहुंच रहा है। वहीं भारतीय रुपया भी कमजोर होकर लगभग 92.20 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के पास खुला। डॉलर के मजबूत होने और रुपये के कमजोर होने से बाजार पर दबाव बढ़ा है, खासकर उन सेक्टरों पर जो ग्लोबल कीमतों और इंपोर्ट-एक्सपोर्ट से ज्यादा प्रभावित होते हैं।

