अपोलो ने शुरू की कैंसर इलाज में नई तकनीक, अब सांस के साथ भी ट्रैक होगा ट्यूमर
नई दिल्ली। कैंसर उपचार में इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने एक और अहम पहल की है। अपोलो ने हाइपरआर्क टेक्नोलॉजी से युक्त उन्नत रेडियोसर्जरी सिस्टम वेरियन एज को अपनाया है जो जटिल और शरीर के कठिन हिस्सों में स्थित ट्यूमर के उपचार को अधिक सटीक और सुरक्षित बनाती है।
यह उन्नत प्रणाली वास्तविक समय में ट्यूमर की ट्रैकिंग और सब-मिलीमीटर सटीकता प्रदान करती है जिससे कम दुष्प्रभावों के साथ तेज, सुरक्षित और अधिक प्रभावी उपचार संभव हो पाता है। इससे ट्यूमर के आसपास के स्वस्थ ऊतकों को न्यूनतम नुकसान पहुंचता है। इसकी विशेषता यह है कि यह सांस के दौरान ट्यूमर की हलचल को ट्रैक कर उपचार की सटीकता बनाए रखती है।इस तकनीक में डीप इंस्पिरेशन ब्रीथ होल्ड (डीआईबीएच) जैसी उन्नत मोशन मैनेजमेंट सुविधा शामिल है जो विशेष रूप से बाएं स्तन कैंसर के मरीजों में हृदय को रेडिएशन से बचाने में मददगार है। इसके अलावा पेट, लिवर, फेफड़े, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और जेनिटोयूरिनरी ट्यूमर के इलाज में भी यह बेहतर इमेजिंग और सटीकता प्रदान करती है।
डॉक्टरों के मुताबिक, इस वेरियन एज की खासियत यह भी है कि ये एक ही सत्र में कई मेटास्टेसिस का उपचार कर सकता है, जिससे कुल इलाज का समय पारंपरिक एलआईएनएसी या एसआरएस उपचार की तुलना में एक-तिहाई तक कम हो सकता है। रेडिएशन बीम और ट्रीटमेंट काउच की समन्वित गति निरंतर और सटीक विकिरण सुनिश्चित करती है, जिससे मरीज को कम असुविधा होती है।
नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. जी. के. जाधव ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म छोटे से लेकर बड़े और जटिल ट्यूमर तक के उपचार में नई संभावनाएं खोलता है। इसी विभाग की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. सपना मनोचा वर्मा ने बताया कि यह तकनीक सांस के दौरान भी ट्यूमर की स्थिति के अनुसार रेडिएशन बीम को स्वतः समायोजित करती है जिससे स्वस्थ ऊतकों की बेहतर सुरक्षा होती है और मरीजों को कम दुष्प्रभाव के साथ तेज रिकवरी मिलती है। इनके अलावा वरिष्ठ सलाहकार डॉ. रॉबिन खोसा ने कहा कि हाइपरआर्क तकनीक सब-मिलीमीटर सटीकता के साथ रेडिएशन देने में सक्षम है, जिससे कई ब्रेन मेटास्टेसिस जैसे जटिल मामलों का भी अधिक सुरक्षित उपचार संभव है।
इस शुभारंभ समारोह में अस्पताल के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के अन्य वरिष्ठ डॉक्टर मनो भदौरिया, डॉ. अदिति अग्रवाल और डॉ. देवाशीष त्रिपाठी भी उपस्थित थे। डॉक्टरों का कहना है कि वेरियन एज सिस्टम विशेष रूप से उन ट्यूमर के उपचार में प्रभावी है जो शरीर के संवेदनशील या कठिन हिस्सों में स्थित होते हैं। बेहतर इमेजिंग और उच्च सटीकता के कारण चिकित्सक जरूरत पड़ने पर अधिक रेडिएशन डोज सुरक्षित रूप से दे सकते हैं, जिससे इलाज की सफलता दर बढ़ने और सामान्य ऊतकों पर दुष्प्रभाव कम होने की संभावना रहती है। इस नई

